आखिर कैसे होती है रेप की जांच | Rape Janch Kaise Hoti Hai | rape status for girls, two finger test

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आखिर कैसे होती है रेप की जांच/ Rape Janch Kaise Hoti Hai/ rape status for girls, two finger test

बलात्कार के दो दिन बीतने के बाद 18 साल की वह लड़की एक सरकारी अस्पताल में सफेद रंग की चादर पर लेटी थी. तमाम कुछ सोंचते हुए वह खुद को खूब कोसती है कि आखिर उन्होंने मेरे साथ ऐसा क्यों किया। तभी दूर से नर्स आती हुई दिखाई देती है। अब बारी थी रेप की जांच कराने की, यानि लड़की के साथ रेप हुआ है या नहीं इसकी जांच कराने की नौबत अब आ गई थी।

नर्स ने आकर पहले उसकी सलवार खोलकर नीचे की तरफ खिसकाया और फिर कमीज को नाभि से ऊपर तक कर दिया. उधर दूसरी तरफ से दो पुरुष डॉक्टर भी आए. उन्होंने लड़की की जांघों के पास हाथ लगाकर जांच शुरू की तो उसने एकदम से अपने शरीर को कड़ा कर लिया. लड़की दर्द और शर्म के मारे पहले ही मरी जा रही थी कि एकदम दस्ताने पहने हुए हाथों की दो उंगलियां उसके प्राइवेट पार्ट के अंदर पहुंच गईं. यानि डॉक्टर ने सैंपल लेने के लिए उस लड़की के प्राइवेट पार्ट में दो उंगलियां डाल दी।

वह दर्द से कराह उठी. इस दौरान उस लड़की को ऐसा लग रहा था कि जांच के नाम पर उसके साथ एक बार फिर रेप किया गया है। भारत में बलात्कार की शिकार होने वाली महिला को दो बार तकलीफ झेलनी पड़ती है. पहली बार वह तब तकलीफ झेलती है, जब उसका बलात्कार होता है और दूसरी बार हमारी व्यवस्था उसे परेशान करती है. फिर डॉक्टर कांच की स्लाइडों पर उंगलियां साफ करके उसे अकेला छोड़कर वहां से चलते बने.

उन्होंने जांच से पहले न तो लड़की से अनुमति ली और न ही उसे बताया कि उन्होंने क्या और क्यों किया. आपको बता दें कि इस जांच की प्रक्रिया को भारत में टू फिंगर टेस्ट के नाम से जाना जाता है। टू फिंगर टेस्ट भारत में गैर कानूनी है और अवैधानिक भी है.

लेकिन आज भी कुछ डॉक्टर ऐसे हैं जो धड़ल्ले से फिंगर टेस्ट करते हैं। देश में प्रचलित टीएफटी यानि टू फिंगर टेस्ट से बलात्कार पीड़ित महिला की प्राइवेट पार्ट के लचीलेपन की जांच की जाती है. अंदर प्रवेश की गई उंगलियों की संख्या से डॉक्टर अपनी राय देता है कि ‘महिला सक्रिय सेक्स लाइफ’ में है या नहीं.

लेकिन भारत में अब ऐसा कोई कानून नहीं है, जो डॉक्टरों को ऐसा करने के लिए कहता है. भारत में रहरहकर टू फिंगर टेस्ट पर चर्चा होती रहती है। लेकिन यकीन मानिये ये एक मानसिक प्रताड़ना जैसा है जो रेप पीड़िता को अस्पताल पहुंचने पर दिया जाता है। बीते दिनों बिहार में एक ऐसा ही मामला सामने आया था कि जिसमें एक रेप पीड़िता के साथ ये टेस्ट एक या दो बार नहीं 5 बार किया गया था। 

इसके अलावा भी देश में इसतरह की खबरें आती रहती हैं। 1997 में एक कानून बनाया गया था कि सिर्फ महिला डॉक्टर ही रेप पीड़िता की जांच कर सकती हैं। लेकिन महिला डॉक्टरों की कमी होने के चलते ये कानून ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाया फिर साल 2005 में इसमें संशोधन कर दिया गया।

जिसमें कहा गया कि पुरुष डॉक्टर भी रेप पीड़िता की मेडिकल जांच कर सकते हैं। लेकिन इस कानून में रेप पीड़िता की सहमति लेना डॉक्टरों के लिए आवश्यक है। भारत में साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने टू फिंगर टेस्ट पर रोक लगा दी है। भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी टू फिंगर टेस्ट पर रोक लगाई है।

इसके अलावा नए दिशा निर्देश भी जारी किए गए हैं। जिसमें रेप पीड़ितों के लिए एक विशेष कक्ष बनाया जाएगा जिसमें उनका अलग अलग मेडिकल परीक्षण किए जाएंगे। लेकिन अभी भी कई राज्यों में टू फिंगर टेस्ट की अनुमति दी जाती है।

उदाहरण के लिए राजस्थान को ले लीजिए यहां अस्पतालों में इस्तेमाल किए जाने वाले मानक फार्म में एक ऐसा कालम है जो योनिच्छेद की स्थिति के बारे में जानकारी मांगता है।

यानि जिसमें लड़की के प्राइवेट पार्ट में डॉक्टर उंगली डालकर चेक कर सकता है। इस टेस्ट में पीड़िता लड़की का दो बार उत्पीड़न होता है पहला जब उसके रेप होता है दूसरा जब उसके साथ टू फिंगर टेस्ट किया जाता है। हालाकि सरकार ने अभी इस पर कोई ठोस कानून नहीं बनाया है। आप इस बारे में क्या सोंचते हैं हमें कमेंट में जरूर बताइगा। 

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